सन्त कालीचरण महाराज की महात्मा गांधी पर कुछ गलत टिप्पणी पर विवाद :-

धर्म संसद (Dharm Sansad) में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को अपशब्द और अमर्यादित टिप्पणी करने वाले संत कालीचरण को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक संगठन द्वारा आयोजित धर्म संसद में धर्मगुरु कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी के बारे में अपमानजनक शब्द कहे थे और नाथूराम गोडसे को बापू की हत्या के लिए सही ठहराया था।

छत्तीसगढ़ में कालीचरण महाराज के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई गई थी। 

पुलिस तभी से उनकी तलाश कर रही थी। पूरे विवाद के चार दिनों बाद बृहस्पतिवार (3 दिसंबर, 2021) की सुबह लगभग 4:00 बजे पुलिस ने कालीचरण को मध्य प्रदेश के खजुराहो से गिरफ्तार कर लिया। कालीचरण जी को अब रायपुर लाने की कार्यवाही की जा रही है।

कालीचरन को गिरफ्तार करना क्या उचित था-

पुलिस द्वारा संत कालीचरण जी को गिरफ्तार करना सही मायने में उचित था या नहीं, पर भारत में ऐसा हमेशा होता रहता है कि लोग हमारी भारत माता को गालियां देते हैं और उनके साथ अश्लीलता दिखाते हैं फिर भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता। और भी अनेक भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान के बदले अपमानजनक शब्द हमेशा बोला जाता है लेकिन उन लोगों को भी गिरफ्तार नहीं किया जाता और वीर सावरकर जैसे अनेक लोगों को लोग हमेशा अनाप-शनाप शब्द बोलते रहते हैं फिर भी उन पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता। तो महात्मा गांधी ही ऐसे कौन से बड़े चीज थे कि उन पर थोड़ा सा गलत बयान हो गया तो संत कालीचरण जी को गिरफ्तार कर लिया गया।

महात्मा गांधी का इतिहास पढ़ने के बाद तो यही पता चलता है कि उन्होंने कोई बहुत बड़ा काम भारत के लिए नहीं किया था कि उन्हें राष्ट्र पिता का दर्जा दे दिया गया। ये तो कोई महान व्यक्ति नहीं दिखाई पड़ते, भले ही इन्हें राष्ट्रपिता का दर्जा दे दिया गया हो।




मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी को जो कि हमारे हिंदू राष्ट्र भारत में लोग हमेशा उल्टा सीधा बोलते रहते हैं उन्हें भी गिरफ्तार नहीं किया जाता तो फिर इन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया। अतः उचित यही होगा कि संत कालीचरण जी को जल्द से जल्द रिहा कर दें अन्यथा उन सभी लोगों को गिरफ्तार करें जो देश के स्वतंत्रता सेनानियों, भारत माता, भगवान इत्यादि को हमेशा अनाप-शनाप और उल्टा बोलते हैं और गालियां देते हैं, उन सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाए नहीं तो संत कालीचरण जी को भी छोड़ दिया जाए।

ये लेखक के अपने विचार हैं।